पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को बिना स्पष्ट लक्ष्य वाली जंग करार दिया।
ट्रंप की नीति पर बोल्टन का गुस्सा
जॉन बोल्टन, जो कभी ट्रंप के करीबी रहे, ने फर्स्टपोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप अमेरिकी जनता और कांग्रेस को यह समझाने में नाकाम साबित हुए कि ईरान से युद्ध क्यों लड़ा जा रहा है। उन्होंने इसे वियतनाम और अफगानिस्तान युद्धों से तुलना करते हुए चेताया कि बिना लक्ष्य के यह जंग सालों तक खिंच सकती है। बोल्टन ने जोर देकर कहा, “अगर खुद लक्ष्य साफ नहीं, तो जीत कैसे होगी?”
बोल्टन स्वयं ईरान में सत्ता परिवर्तन के समर्थक हैं, लेकिन ट्रंप के तरीके से नाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने बिना तैयारी के युद्ध शुरू कर दिया, और राष्ट्रपति की ‘अनिश्चितता’ अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
मिनाब गर्ल्स स्कूल हमले पर माफी की मांग
ईरान के मिनाब शहर में एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में 165 मासूम बच्चियों की मौत ने विश्व को हिला दिया। बोल्टन ने स्वीकार किया कि अमेरिका ने जानबूझकर मासूमों को निशाना नहीं बनाया, लेकिन यदि यह गलती हुई तो ‘हमें माफी मांगनी चाहिए और हर्जाना देना चाहिए।’
उन्होंने अनुमान लगाया कि वह भवन पहले सैन्य परिसर का हिस्सा रहा होगा, और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को अब स्कूल बनने की जानकारी नहीं थी। बोल्टन ने इसे ‘बड़ी लापरवाही’ बताया।
ईरान संकट का भविष्य और ट्रंप पर खतरा
बोल्टन ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी से तेल कीमतें बढ़ेंगी, जिसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ेगा। ईरान के पलटवार का ट्रंप ने सही अनुमान नहीं लगाया।
उन्होंने ईरान की आंतरिक स्थिति पर कहा कि महसा अमीनी की मौत और आर्थिक संकट से 31 प्रांतों में युवा व महिलाएं सरकार के खिलाफ हैं। यदि शासन गिरा, तो पहले सैन्य सरकार आएगी, फिर नया संविधान बनेगा।
अमेरिका-ईरान तनाव का वैश्विक प्रभाव
यह विवाद मध्य पूर्व में चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का हिस्सा है, जहां अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। बोल्टन के बयान से ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।